नगांव में स्वरसम्राट भारत रत्न डॉ. भूपेन हज़ारिका की 14वीं पुण्यतिथि का भव्य आयोजन
5000 से अधिक छात्र-छात्राओं और जिलावासियों ने सामूहिक रूप से उनका अमर गीत "मानुहे मानुहार बाबे" गया।

जयप्रकाश सिंह
नगांव,5 नवंबर
स्वरसम्राट भारत रत्न डॉ. भूपेन हज़ारिका की वर्षव्यापी जन्मशती समारोह के तहत असम सरकार के निर्देशानुसार, सांस्कृतिक परिक्रमा विभाग के तत्वावधान में तथा नगांव जिला प्रशासन के सहयोग से जिले के ऐतिहासिक स्थल नेहरूबाली के मैदान में उनकी 14वीं पुण्यतिथि अत्यंत भव्य ढंग से आयोजित किया गया।
आज प्रातः डॉ. भूपेन हज़ारिका क श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा शहर के विभिन्न स्थलों पर स्थापित स्थायी ऑडियो यंत्रों के माध्यम से उनके कालजयी गीतों का प्रसारण किया गया।इसके पश्चात नेहरूबाली में आयोजित मुख्य समारोह के दौरान सर्वप्रथम कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों के साथ असम सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मंत्री केशव महंत ने डॉ. भूपेन हज़ारिका के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मंत्री श्री महंत ने DELPHICS International कला समूह के कलाकारों द्वारा बनाए गए चित्रकला प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।असम का राष्ट्रीय गीत गाने के साथ आरंभ हुए इस कार्यक्रम में जिले के दो प्रसिद्ध कलाकार रतीमोहन नाथ और रंजन बेजबरुवा को “सुधाकंठ स्मारक मुद्रा” से सम्मानित किया गया। नागांव जिले की ओर से गुवाहाटी में डॉ. हज़ारिका के जन्मशती पर गीत प्रस्तुत करने वाले कलाकारों को भी आज के इस कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। उन्हीं कलाकारों ने मंच पर डॉ. हज़ारिका के गीतों का एक सुंदर प्रस्तुत दिया।कार्यक्रम में जिला आयुक्त देवाशीष शर्मा ने स्वागत भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि डॉ. भूपेन हज़ारिका ने असमिया गीतों को विश्व पटल पर स्थापित किया और नयी पीढ़ी से आग्रह किया कि वे उनके अमर सृजन की रक्षा और प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाएं।नगांव-बटद्रवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक रूपक शर्मा ने अपने भाषण में कहा कि डॉ. हज़ारिका द्वारा 50 वर्ष पूर्व रचे गए गीत आज भी सत्य सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा उनके अमर गीत “मानुहे मानुहार बाबे” को संयुक्त राष्ट्र में मानवता के गीत के रूप में मान्यता दिलाने हेतु किए गए आवेदन के लिए वे मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया।मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मंत्री केशव महंत ने अपने भाषण में कहा कि— जब भी राष्ट्र अस्तित्व के संकट में होता है तब असम की धरती पर ऐसे महान सपूतों का जन्म होता है। बीसवीं शताब्दी में असमिया भाषा और संस्कृति के उत्थान में योगदान देने वाले महान कलाकार डॉ. भूपेन हज़ारिका का नाम अग्रणी है। मंत्री ने कहा कि हज़ारिका जी ने अपने गीतों के माध्यम से हमारी असमिया जाति को राष्ट्रीय चेतना से ओतप्रोत किया।
इसके बाद कार्यक्रम की मुख्य गतिविधि प्रारंभ हुई। जिले के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएँ एवं आम नागरिक, कुल मिलाकर पाँच हजार से अधिक लोगों ने “मानुहे मानुहार बाबे” गीत को एक स्वर में गाकर नेहरूबाली मैदान को मानवीयता के स्वर से गूंज उठा।इस अवसर पर मंत्री के साथ अन्य विधायकगण, जिला आयुक्त सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
कार्यक्रम में सामागुड़ी विधानसभा क्षेत्र के विधायक दिप्लु रंजन शर्मा, रहा विधानसभा क्षेत्र के विधायक शशिकांत दास, जिला परिषद की अध्यक्षा गीतांजलि हज़ारिका, नगर बोर्ड की अध्यक्षा अंबिका मजूमदार, जिला विकास आयुक्त देवयानी चौधरी, नगर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष ध्रुवज्योति शर्मा, समाजसेवी अभिजीत नाथ, रंजीत बोरदोलोई सहित जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, छात्र-छात्राएँ, स्वयंसेवी संगठन के सदस्य एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।




