असमधर्म और आस्था

धुबरी में धूमधाम से मनाई गई जलझूलनी एकादशी, शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

श्रद्धालुओं ने इस पावन पर्व पर व्रत-उपवास रखकर भगवान विष्णु से लोककल्याण और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।

राजा शर्मा

धुबरी, 3 सितंबर 2025/असम.समाचार

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के अवसर पर आज धुबरी के सत्यनारायण ठाकुरबाड़ी और सीताराम ठाकुरबाड़ी में जलझूलनी एकादशी का पर्व बड़े धूमधाम और श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर आयोजित शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

शोभायात्रा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के बालरूप “बालगोपाल” को पालकी में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया तथा ब्रह्मपुत्र नदी में उनका पवित्र स्नान संस्कार संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण और नगर की गलियों में हरि नाम संकीर्तन गूंज उठा।

क्या है जलझूलनी एकादशी का महत्व?

जलझूलनी एकादशी, जिसे परिवर्तनी एकादशी या डोल ग्यारस भी कहा जाता है, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपने वामन रूप में शयनावस्था में करवट बदलते हैं। इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन भगवान की प्रतिमा को पालकी में बिठाकर जल के निकट शोभायात्रा निकालने की परंपरा है, जिससे इसका नाम “जलझूलनी एकादशी” पड़ा।

श्रद्धालुओं ने इस पावन पर्व पर व्रत-उपवास रखकर भगवान विष्णु से लोककल्याण और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।

 

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!