फेमिना पत्रिका के कवर पेज पर नॉर्थ ईस्ट की दो महिला सैन्य अधिकारी: देश के लिए गौरव का पल

राष्ट्रीय डेस्क/जयप्रकाश अग्रवाल
नई दिल्ली/तेज़पुर, 07 अगस्त 2025/असम.समाचार
भारत की आज़ादी के 78 साल पूरे होने के अवसर पर ‘फेमिना इंडिया’ पत्रिका ने एक विशेष अंक जारी किया है, जिसमें भारतीय सेना की 10 उल्लेखनीय महिला अधिकारियों को स्थान दिया गया है। इस विशेषांक के कवर पेज पर पूर्वोत्तर भारत की दो महिला सैन्य अधिकारियों मेजर द्विपन्निता कलिता और कर्नल पोनुंग डोमिंग को स्थान देकर न सिर्फ क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को सम्मानित किया गया है, बल्कि महिला सशक्तिकरण का भी सशक्त संदेश दिया गया है।
असम की पहली महिला पैराट्रूपर: मेजर द्विपन्निता कलिता
सोनितपुर ज़िले के देकियाजुली कस्बे की रहने वाली मेजर द्विपन्निता कलिता असम की पहली महिला पैराट्रूपर हैं। आर्मी मेडिकल कोर की पैराशूट मेडिकल रेजिमेंट की यह बहादुर अधिकारी एक साधारण पृष्ठभूमि से आई हैं, लेकिन उनका संघर्ष असाधारण रहा है। उन्होंने विदेश जाकर (फिलीपींस) एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और दिल्ली के एक अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा एवं स्त्री रोग विभाग में सेवा दी।
30 वर्ष की उम्र में, एक विवाहित महिला के रूप में भारतीय सेना में शामिल होकर उन्होंने सामाजिक मान्यताओं को चुनौती दी और एक नई मिसाल कायम की। ड्यूटी के प्रति समर्पण के साथ-साथ मेजर कलिता बागवानी, कुकिंग, जैज़ संगीत और अपने पालतू कुत्तों के साथ समय बिताना पसंद करती हैं, जिन्हें वे “तनाव निवारक” कहती हैं। उनकी प्रेरणादायक यात्रा अनगिनत महिलाओं के लिए एक उदाहरण है।
अरुणाचल की पहली महिला कर्नल: कर्नल पोनुंग डोमिंग
फेमिना पत्रिका के कवर पर प्रकाशित दूसरी सैन्य अधिकारी हैं अरुणाचल प्रदेश की कर्नल पोनुंग डोमिंग, जो भारतीय सेना में कर्नल बनने वाली राज्य की पहली महिला हैं। इससे पहले वे राज्य की पहली महिला मेजर भी रह चुकी हैं। उन्हें लद्दाख क्षेत्र में अपनी सेवा के लिए सेना पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
कर्नल डोमिंग ने न सिर्फ उत्तरी क्षेत्र में दुनिया की सबसे ऊँची सीमा पर तैनात टास्क फोर्स की कमान संभाली, बल्कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत कांगो में भी उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
फेमिना इंडिया का यह विशेषांक भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और नेतृत्व को रेखांकित करता है। मेजर कलिता और कर्नल डोमिंग की प्रेरणादायक कहानियाँ न केवल पूर्वोत्तर भारत, बल्कि पूरे देश की बेटियों के लिए एक नई राह दिखा रही हैं।
इन दो जांबाज़ अधिकारियों की उपस्थिति कवर पेज पर यह साबित करती है कि अब महिला सैनिक सिर्फ मैदान में नहीं, नेतृत्व में भी बराबरी का योगदान दे रही हैं।
स्रोत: फेमिना इंडिया स्वतंत्रता विशेषांक/तेज़पुर संवाददाता