काजीरंगा में हाथी के बच्चे का नाम ‘मायाबिनी’, जूबिन गर्ग को श्रद्धांजलि
जूबिन गर्ग के संगीत ने जैसे लाखों दिलों को छुआ है, वैसे ही मायाबिनी का जन्म काजीरंगा के जंगलों में नई उम्मीद और प्रेम का प्रतीक बन गया है।

किशन छेत्री
काजीरंगा 6 अक्टूबर 2025/असम.समाचार
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य में एक नई जिंदगी ने जन्म लिया है। उद्यान की सबसे उम्रदराज और प्रिय हथिनी कुवारी ने 4 अक्टूबर को एक मादा बच्चे को जन्म दिया है, जिसका नाम ‘मायाबिनी’ रखा गया है। दिवंगत असमिया सांस्कृतिक आइकन जूबिन गर्ग को श्रद्धांजलि स्वरूप यह नाम रखा गया है, जिनका 19 सितंबर को सिंगापुर में निधन हो गया था।
असम के वन मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने बच्चे के जन्म की घोषणा करते हुए कहा कि ‘मायाबिनी’ नाम “अपार स्नेह और जनभावना” से प्रेरित है और यह जंगल में नई जिंदगी, आशा और सौहार्द का प्रतीक है। यह नाम जूबिन गर्ग के लोकप्रिय गीत “मायाबिनी रातिर बुकुत” से लिया गया है, जो उनके असमय निधन के बाद से प्रशंसकों के लिए एक भावनात्मक गान बन गया है।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की निदेशक डॉ. सोनाली घोष ने इस अवसर पर कहा, “यह काजीरंगा के लिए बेहद खुशी की खबर है। विश्व पशु दिवस के अवसर पर कल अगरतली जंगल में हाथिनी ने एक बच्चे को जन्म दिया है। हमने उसका नाम मायाबिनी रखा है। हमारे वनकर्मी जब पार्क के अंदर उदासी या घर की याद में घिर जाते हैं, तो जूबिन गर्ग के गीत सुनकर खुद को सांत्वना देते हैं। असम के हर व्यक्ति की तरह वनकर्मियों का भी इस कलाकार से गहरा लगाव है। इसी भावना से सबने मिलकर इस नवजात का नाम मायाबिनी रखने का निर्णय लिया।”
जूबिन गर्ग के संगीत ने जैसे लाखों दिलों को छुआ है, वैसे ही मायाबिनी का जन्म काजीरंगा के जंगलों में नई उम्मीद और प्रेम का प्रतीक बन गया है।



