डिब्रूगढ़ बना भावनाओं का दरिया, जुबीन गर्ग को अंतिम विदाई

दिनेश दास
डिब्रूगढ़, 20 सितम्बर 2025/असम.समाचार
शहर की गलियां आज सिर्फ भीड़ से नहीं, बल्कि भावनाओं से भरी हुई थीं। आसमान से ड्रोन कैमरों ने जिस दृश्य को कैद किया, वह किसी मेले जैसा नहीं, बल्कि श्रद्धा और आंसुओं की नदी जैसा था। लाखों लोग हाथों में मोमबत्तियां, फूल और अपने चहेते जुबीन गर्ग की तस्वीरें लिए मानो एक ही धुन पर थिरकते हुए चल रहे थे।
लेकिन यह धुन संगीत की नहीं थी, बल्कि दर्द और मोहब्बत की थी। ज़ुबीन सिर्फ एक गायक नहीं थे, असम के दिल की धड़कन थे। यही वजह रही कि पूरा डिब्रूगढ़ ठहर-सा गया। दुकानों के शटर गिरे, बसों के हॉर्न थमे, और हर कोना उनके गीतों की गूंज से भर उठा।

लोगों की आंखें नम थीं, पर होंठ अनायास ही उनके गीत गुनगुना रहे थे। किसी ने कहा“आज ज़ुबीन चले गए, पर उनकी आवाज़ हमारी सांसों में बस गई है।”
यह कोई आम श्रद्धांजलि नहीं थी, यह था असम का अपने सबसे बड़े सांस्कृतिक सितारे के साथ अंतिम संवाद।




