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अमित शाह की रैली में दिखा जनसैलाब, अपने परम मित्र अशोक सिंघल की पीठ थपथपाई

सभा के अंत में शाह ने लोगों से अपील की कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को समर्थन देकर हिमंत बिस्वा सरमा को फिर मुख्यमंत्री बनाएं, ताकि असम को “घुसपैठिया-मुक्त” बनाते हुए शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ाया जा सके।

विकास शर्मा,

ढेकियाजुली (सोनितपुर),29 मार्च/असम.समाचार

बारिश से भीगी दोपहर, देर से पहुँचा काफिला और भीड़ के बीच गूंजते चुनावी नारे—ढेकियाजुली की चुनावी सभा रविवार को कुछ इसी अंदाज़ में सुर्खियों में रही। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यहां मंच संभालते ही असम की राजनीति के सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक, अवैध घुसपैठ, को फिर जोरदार तरीके से उठाया।

शाह ने कहा कि बीते दस वर्षों में भाजपा सरकार ने असम में घुसपैठ को काफी हद तक रोकने का काम किया है, लेकिन यह अभी पर्याप्त नहीं है। उनका कहना था कि आने वाले समय में हर अवैध प्रवासी को उसके देश वापस भेजने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

सभा में उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अब तक करीब 1.25 लाख एकड़ जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया है और अगले पांच वर्षों में एक इंच जमीन भी अवैध कब्जे में नहीं रहने दी जाएगी।

रैली के दौरान शाह ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने हमेशा घुसपैठियों को संरक्षण देने की राजनीति की है। राहुल गांधी और असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को भी भाषण में जगह मिली। शाह ने उरी, पुलवामा और अन्य घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।

इस चुनावी सभा का एक अलग दृश्य मौसम ने भी बनाया। दरअसल, कार्यक्रम सुबह करीब 11 बजे शुरू होना था, लेकिन भारी बारिश के कारण शाह का हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका। बाद में वे सड़क मार्ग से ढेकियाजुली पहुंचे, जिससे रैली लगभग तीन घंटे देरी से शुरू हुई। इंतजार के बावजूद मैदान में जुटी भीड़ ने भाजपा उम्मीदवार और राज्य के मंत्री अशोक सिंघल के समर्थन में जोरदार नारे लगाए।

सभा के अंत में शाह ने लोगों से अपील की कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को समर्थन देकर हिमंत बिस्वा सरमा को फिर मुख्यमंत्री बनाएं, ताकि असम को “घुसपैठिया-मुक्त” बनाते हुए शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ाया जा सके।

गौरतलब है कि असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को होगी।

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