मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश: असहयोग और सिविल अवज्ञा से बांग्लादेशियों को मजबूर करेंगे, रोज़ 20–25 का पुशबैक

केशव पारीक,संवाददाता
शिवसागर (असम), 4 फरवरी 2026
मुख्यमंत्री ने अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के मुद्दे पर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि असम में उन्हें मजबूर करने के लिए असहयोग और सिविल अवज्ञा की नीति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि असमिया लोग स्वयं त्याग नहीं करेंगे, तो बांग्लादेशियों को बाहर करना संभव नहीं होगा।
मुख्यमंत्री ने नोटिस और आवेदन प्रक्रिया को लेकर कहा कि “एप्लीकेशन जानी चाहिए और लोगों को उसे स्वीकार भी करना चाहिए। एक कागज ही तो भेजा जाता है, इसे लेकर इतनी चिंता नहीं करनी चाहिए। यदि नोटिस नहीं भेजे जाएंगे, तो मतदाता सूची से नाम कैसे काटे जाएंगे।” उन्होंने कहा कि जिन घरों में नोटिस पहुंचे हैं, उन्हें इसे अपने देश के लिए योगदान के रूप में देखना चाहिए।
फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में लंबित मामलों को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि रोज़ाना 20 से 30 लोगों को असम से खदेड़ा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इसका प्रमाण उनके सोशल मीडिया हैंडल पर देखा जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सभी को लाइन में खड़ा कर रेल से बांग्लादेश भेजना संभव नहीं है, इसलिए अलग तरीके अपनाने पड़ते हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हम खदेड़ें, इससे अच्छा है कि लोग खुद ही जाने को मजबूर हो जाएं। इसके लिए यहां भी और वहां भी थोड़ा सख्त रवैया अपनाना पड़ेगा।” उन्होंने बताया कि अब तक डेढ़ लाख बीघा भूमि से अतिक्रमण हटाया जा चुका है। जमीन वापस नहीं मिलने की स्थिति में अवैध रूप से रह रहे लोगों को असम छोड़ना ही होगा।
उन्होंने आंदोलन और सरकार की रणनीति में अंतर बताते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा माहौल बनाना है, जिसमें अवैध रूप से रह रहे लोग असम में रह ही न सकें। “जमीन नहीं देंगे, गाड़ी नहीं देंगे, रिक्शा नहीं देंगे, ठेला नहीं देंगे, तो वे खुद ही यहां से चले जाने को मजबूर हो जाएंगे,” मुख्यमंत्री ने कहा।
मुख्यमंत्री ने अपनी नीति को “पुशबैक” बताते हुए कहा कि जहां भी अवैध व्यक्ति मिले, वहीं से खदेड़ दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि इस नीति के तहत रोज़ाना 20–25 लोगों को असम से बाहर किया जा रहा है और कोई भी कोर्ट जाने की हिम्मत नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि यही सरकार की कार्यप्रणाली की सफलता है।
अंत में मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने देश को नॉन-कोऑपरेशन और सिविल डिसोबिडियंस का रास्ता दिखाया था। “जब असमिया लोग असहयोग और सिविल अवज्ञा अपनाएंगे, तो अवैध रूप से रह रहे लोग खुद ही असम छोड़ने को बाध्य हो जाएंगे।” उन्होंने कहा कि अब तक की कार्रवाई से डेढ़ लाख बीघा जमीन खाली हुई है, जो असमिया लोगों की थी और उन्हें ही वापस मिली



