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सरुसजाई में प्रधानमंत्री की उपस्थिति में ऐतिहासिक बागुरुम्बा नृत्य प्रदर्शन

10 हजार से अधिक कलाकारों की सहभागिता, बोडो संस्कृति को मिली वैश्विक पहचान की नई उड़ान

विकास शर्मा

गुवाहाटी 17 जनवरी 2026/असम.समाचार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम के दो दिवसीय दौरे के दौरान गुवाहाटी स्थित सरुसजाई के अर्जुन भोगेश्वर बरुआ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित ऐतिहासिक बागुरुम्बा नृत्य प्रदर्शन का साक्षी बने। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा की उपस्थिति में आयोजित इस भव्य आयोजन का नाम ‘बागुरुम्बा ध्वौ 2026’ रखा गया था।

असम सरकार द्वारा बोडो समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य के 23 जिलों की 81 विधानसभा क्षेत्रों से आए 10 हजार से अधिक कलाकारों ने भाग लिया।

इससे पूर्व शिल्पी दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान सांस्कृतिक व्यक्तित्व ज्योति प्रसाद अग्रवाला को पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ. सरमा के साथ विशेष वाहन में बैठकर स्टेडियम का भ्रमण किया और कलाकारों व दर्शकों का अभिवादन किया।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरु कालिचरण ब्रह्मा, बोडोफा उपेन्द्रनाथ ब्रह्मा और शिक्षाविद् सीतानाथ ब्रह्मा चौधरी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सतिश चंद्र बसुमतारी, उस्ताद कामिनी कुमार नरजारी और मदराम ब्रह्मा को भी नमन किया, जिनके मार्गदर्शन में 26 जनवरी 1957 को नई दिल्ली में बागुरुम्बा नृत्य को राष्ट्रीय पहचान मिली थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बागुरुम्बा नृत्य बोडो समुदाय की अस्मिता, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। प्रधानमंत्री की उपस्थिति में 10 हजार से अधिक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत यह नृत्य बागुरुम्बा की वैश्विक पहचान की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने कहा कि गुवाहाटी ने इससे पहले कभी इतने बड़े पैमाने पर बागुरुम्बा नृत्य नहीं देखा। मुख्यमंत्री ने कहा, “आज का बागुरुम्बा ध्वौ पूरे असम को एक सूत्र में बांधते हुए ‘बोर असम’ और ‘महान भारत’ की भावना को सुदृढ़ करेगा।”

डॉ. सरमा ने इसे राज्य के सांस्कृतिक इतिहास में एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने स्मरण कराया कि इसी सरुसजाई मैदान में 14 अप्रैल 2023 को 11 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता से ‘बिहू बिनंदिया’ और फरवरी 2025 में 8 हजार से अधिक चाय जनजाति व आदिवासी युवाओं द्वारा झूमुर नृत्य प्रस्तुत किया गया था।

उन्होंने प्रधानमंत्री की उपस्थिति में हुए बागुरुम्बा प्रदर्शन को बोडो संस्कृति का परिभाषित प्रतीक करार दिया।
मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में बोडोफा उपेन्द्रनाथ ब्रह्मा की प्रतिमा स्थापना और उनके नाम पर सड़क के नामकरण के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार और 2020 में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुए शांति समझौतों ने बोडोलैंड क्षेत्र को शांति, विकास और प्रगति की राह पर अग्रसर किया है। साथ ही, बीटीआर के बाहर रहने वाले बोडो-कचारी लोगों के कल्याण हेतु बोडो कचारी वेलफेयर ऑटोनॉमस काउंसिल के गठन का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीटीसी का गठन, बोडो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान मिलना और असम में सह-राजभाषा का दर्जा मिलना बोडो समाज की विरासत को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की उपस्थिति ने बोडो समुदाय के गौरव और सम्मान को नई ऊंचाई दी है तथा यह आयोजन बोडोफा उपेन्द्रनाथ ब्रह्मा के आदर्शों को साकार करने की प्रेरणा देगा।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, असम विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी, बीटीसी के मुख्य कार्यकारी सदस्य हाग्रामा मोहिलारी, सांस्कृतिक कार्य मंत्री बिमल बोरा, केंद्रीय राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा, सांसद बिजुली कलिता मेधी सहित कई सांसद, विधायक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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