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“गन सैल्यूट की गूंज में अमर हुए जुबीन के गीत”जुबीन के गीतों संग हुई विदाई गुवाहाटी में गूंजा अंतिम सुर

विकाश शर्मा

गुवाहाटी 23 सितंबर 2025/असम.समाचार

गुवाहाटी की हवा मंगलवार को ग़मगीन थी। श्मशान घाट में चिता की आग भले तेज़ थी, पर उसके पार कहीं गूंज रहे थे जुबीन गर्ग के गीत जैसे खुद अपनी विदाई को सुरों से सजाना चाहते हों।

52 साल के जुबीन, जिनका 19 सितंबर को सिंगापुर में निधन हुआ था, अपने चाहने वालों के दिलों में अमर होकर विदा हुए। चिता के धुएं में आंखों का धुआं भी शामिल हो गया पत्नी गरिमा की सिसकियां, परिजनों की चुप्पी और फैंस का सुबकना।

श्मशान घाट पर दृश्य अलग था गन सैल्यूट की आवाज़ें और बीच-बीच में उनके लोकप्रिय गीत। एक तरफ़ सशस्त्र सम्मान, दूसरी तरफ़ सुरों की बारिश। जैसे राज्य और संगीत, दोनों ने मिलकर उन्हें अंतिम सलामी दी हो।

इस भीड़ में सिर्फ़ प्रशंसक नहीं थे। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा भी मौजूद रहे। पर असल भीड़ तो वो लाखों लोग थे, जिन्होंने अंतिम यात्रा में जुबीन के साथ चलकर साबित कर दिया कि कलाकार का निधन शरीर से होता है, गीतों से नहीं।

दिलचस्प ये रहा कि गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में जुबीन का दूसरा पोस्टमॉर्टम हुआ पहला सिंगापुर में ही हो चुका था। शायद विज्ञान अपने हिसाब से जवाब खोज रहा था, जबकि लोग अपने दिल में पहले ही तय कर चुके थे जुबीन अब सिर्फ़ गीत हैं, और गीत कभी मरते नहीं।

 

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