असम देश का चौथा सबसे बड़ा मछली उत्पादक राज्य बना:मुख्यमंत्री

विकास शर्मा
गुवाहाटी 13 जुलाई(असम.समाचार)
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने आज सोनापुर के बगीबाड़ी में भारत के पहले जल प्रौद्योगिकी पार्क ‘एक्वा टेक पार्क’ का भव्य उद्घाटन किया। यह पार्क कोलोंग-कपिली, नाबार्ड, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद , केंद्रीय मीठाजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान , मत्स्य पालन विभाग और सेल्को फाउंडेशन के सहयोग से स्थापित किया गया है।
यह पार्क असम में अपनी तरह का पहला है, जो एक्वापोनिक्स, बायोफ्लॉक तकनीक, आधुनिक मछली उत्पादन, सजावटी मछलियों की पैदावार जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को प्रदर्शित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पार्क मछलीपालकों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देकर उनकी आय बढ़ाने और राज्य की मत्स्य उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि असम जैसी नदी प्रधान भूमि होने के बावजूद राज्य को मछली के लिए आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो चिंता का विषय है। इस दिशा में कोलोंग-कपिली द्वारा उठाया गया कदम सराहनीय है। पिछले 17 वर्षों से यह संस्था आधुनिक मत्स्य तकनीक का प्रशिक्षण देकर युवाओं और मछलीपालकों को आत्मनिर्भर बना रही है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में कोलोंग-कपिली ने ICAR और CIFA के सहयोग से एक्वा कल्चर स्कूल की स्थापना की थी, जिसने प्राकृतिक खेती, मछली बीज उत्पादन और एकीकृत कृषि प्रणाली के क्षेत्र में व्यापक योगदान दिया है।
डॉ. सरमा ने कहा कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच असम ने मछली उत्पादन को दोगुना कर 4.99 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा दिया है और देश का चौथा सबसे बड़ा मछली उत्पादक राज्य बन गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि वह हर क्षेत्र में देश के शीर्ष पांच राज्यों में स्थान बनाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में एशियाई विकास बैंक (ADB) के सहयोग से 800 करोड़ रुपये की लागत से सस्टेनेबल वेटलैंड एवं इंटीग्रेटेड फिशरीज ट्रांसफॉर्मेशन परियोजना चलाई जा रही है। इसके अलावा JICA की मदद से 250 करोड़ रुपये की परियोजना भी संचालित हो रही है।
राज्य सरकार द्वारा इस वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ रुपये की लागत से 10 मछली उत्पादन क्लस्टर विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं। साथ ही पीएम मत्स्य संपदा योजना और SWIFT जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्य के मत्स्य क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने नलबाड़ी के देबोजीत बर्मन, बारपेटा के हेमंत डेका व फतिक अहमद, सोनितपुर के बिस्वजीत बोरा, कछार की सुदीपा डे, तामुलपुर के हरेन्द्रनाथ राभा, जोरहाट के कृष्णा गोगोई और गोलाघाट के ललित दत्ता जैसे मत्स्य उद्यमियों का उदाहरण देते हुए युवाओं से इस क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि ‘मुख्यमंत्री आत्मनिर्भर असम अभियान’ के तहत राहा फिशरी कॉलेज से स्नातक करने वाले युवाओं को ₹5 लाख और मछली पालकों को ₹2 लाख की आर्थिक सहायता दी जा रही है। सितंबर से राज्य के एक लाख युवाओं को इस योजना के तहत आर्थिक लाभ मिलेगा।
इस अवसर पर कोलोंग-कपिली के निदेशक ज्योतिष तालुकदार ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में मत्स्य मंत्री कृष्नेंदु पॉल, दिसपुर विधायक अतुल बोराह, नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक लोकेन दास, मत्स्य विकास निगम के उपाध्यक्ष नबरुण मेधी, मत्स्य निदेशक गौरी शंकर दास सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।



