‘ग्रीनहॉर्न’ के लिए नई होगी सियासत, मेरे लिए नहीं: देवाशीष शर्मा
यानी शर्मा के लिए सियासत कोई बिल्कुल नया मैदान नहीं, बल्कि उसी व्यवस्था का अगला पड़ाव है, जिसके भीतर रहकर वह लंबे समय तक काम करते रहे हैं।

विकास शर्मा,
गुवाहाटी, 8 सितंबर 2026/असम.समाचार
नौकरशाही की फाइलों से राजनीति के मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी देवाशीष शर्मा को अगर भाजपा का टिकट मिलता है, तो उन्हें चुनावी राजनीति की राह मुश्किल नहीं लगती। उलटे उनका मानना है कि प्रशासनिक अनुभव के कारण उनके लिए राजनीति में कदम रखना किसी ‘ग्रीनहॉर्न’ यानी नए खिलाड़ी के मुकाबले काफी आसान होगा।
भाजपा का टिकट मिलने पर चुनाव कितना चुनौतीपूर्ण होगा, इस सवाल पर शर्मा ने कहा कि उनके लिए यह काम “काफी आसान” होगा। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन में रहते हुए वह सरकार और सत्ता में चुने गए जनप्रतिनिधियों के साथ बेहद करीब से काम करते रहे हैं।
शर्मा ने राजनीति और प्रशासन को “एक ही सिक्के के दो पहलू” बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि कानून और नियम बनाते हैं, जबकि कार्यपालिका उन नियमों को लागू करती है। उनके मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया से वह पहले से परिचित हैं।
यानी शर्मा के लिए सियासत कोई बिल्कुल नया मैदान नहीं, बल्कि उसी व्यवस्था का अगला पड़ाव है, जिसके भीतर रहकर वह लंबे समय तक काम करते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसी नए व्यक्ति के लिए राजनीति और व्यवस्था को समझने में स्वाभाविक तौर पर थोड़ा समय लग सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि नया व्यक्ति भी धीरे-धीरे चीजें सीख सकता है।
लेकिन अपने मामले में शर्मा का आकलन कुछ अलग है। उनके शब्दों में, राजनीति में प्रवेश उनके लिए “जो मैं कर रहा था, उसी की कमोबेश निरंतरता” जैसा होगा।
पूर्व नौकरशाह के इस बयान ने असम की आगामी चुनावी राजनीति में एक दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा कर दिया है
क्या सरकारी व्यवस्था के भीतर काम करने का अनुभव अब चुनावी मैदान में भी ‘एंट्री पास’ साबित होगा?



