वंदे मातरम् बयान पड़ा भारी, धिंग विधायक के खिलाफ लोगों की नाराज़गी
विकास शर्मा, संवाददाता, नगांव

धिंग 25 जनवरी 2026/असम.समाचार
26 जनवरी के अवसर पर असम सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक निर्देश को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस आदेश में सभी शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रगान के साथ ‘वंदे मातरम् ‘गीत गाने तथा उसे शिक्षा विभाग के ऐप पर अपलोड करना अनिवार्य बताया गया है। इस फैसले पर धिंग के विधायक अमिनुल इस्लाम ने कड़ी आपत्ति जताई है।
विधायक अमिनुल इस्लाम ने कहा कि हिंदू शिक्षार्थी यदि वंदे मातरम् गाना चाहें तो वे गा सकते हैं, लेकिन इसे सभी पर जबरन लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम में हिंदू देवी-देवताओं, विशेषकर देवी दुर्गा की आराधना का भाव निहित है, जबकि इस्लाम धर्म में अल्लाह के सिवाय किसी अन्य की उपासना की अनुमति नहीं है।
अमिनुल इस्लाम ने कुरान शरीफ का हवाला देते हुए कहा कि सृष्टि का रचयिता, पालनकर्ता और संहारकर्ता केवल अल्लाह है और उसके अलावा किसी अन्य की आराधना करना इस्लाम में सबसे बड़ा गुनाह माना गया है। ऐसे में मुस्लिम शिक्षार्थियों को वंदे मातरम गाने के लिए बाध्य करना धार्मिक हस्तक्षेप है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है। इसलिए वंदे मातरम को अनिवार्य करने के बजाय इसे विकल्प के रूप में रखा जाना चाहिए।
विधायक ने आरोप लगाया कि इस तरह की बाध्यता इस्लाम धर्म की मौलिकता को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।
इस बयान के बाद शिक्षा विभाग के आदेश को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
वहीं, विधायक के इस बयान को लेकर लोगों में नाराज़गी भी देखी जा रही है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उनके बयान को राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़कर देखा है और इसे अनुचित बताया है। सोशल मीडिया पर भी विधायक के बयान की तीखी आलोचना हो रही है। कई लोगों का कहना है कि वंदे मातरम राष्ट्रीय भावना और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा गीत है और इस पर इस तरह की टिप्पणी से समाज में विभाजन की स्थिति बन सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिक्षा विभाग के आदेश और विधायक के बयान को लेकर राजनीतिक व सामाजिक स्तर पर चर्चा और बहस तेज हो गई है।


