थर्ड आईधर्म और आस्थानार्थ-ईस्टराष्ट्रीयलेटेस्ट खबरेंशिक्षासामाजिकसाहित्यसाहित्य जगत

सीमाएं खुलीं, दिल जुड़े: तीन दिनों के लिए पांगसाऊ पास पर भारत–म्यांमार का संगम

विकास शर्मा. संवाददाता

पांगसाऊ पास,भारत–म्यांमार सीमा,22 जनवरी 2026/असम.समाचार

भारत और म्यांमार के बीच सद्भाव, संस्कृति और आपसी विश्वास का प्रतीक पांगसाऊ पास इंटरनेशनल गेट एक बार फिर तीन दिनों के लिए खोल दिया गया है। अरुणाचल प्रदेश के पाटकाई पर्वत शृंखला में स्थित यह अंतरराष्ट्रीय द्वार एशिया के सदाबहार जंगलों के बीच दोनों देशों को जोड़ने वाला एक ऐतिहासिक मार्ग है।

इस अवसर पर आयोजित पांगसाऊ पास इंटरनेशनल फेस्टिवल न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए उत्सव है, बल्कि यह लोगों से लोगों के संपर्क का सशक्त माध्यम भी बन गया है। हर वर्ष तीन दिनों के लिए खुलने वाला यह द्वार बिना पासपोर्ट और वीज़ा के म्यांमार की धरती पर कदम रखने का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है।

द्वितीय विश्व युद्ध के ऐतिहासिक स्टिलवेल रोड से जुड़ा यह क्षेत्र आज फिर से जीवंत हो उठा है। म्यांमार के प्रसिद्ध “लेक ऑफ नो रिटर्न” के समीप बसे गांवों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पारंपरिक बाजार और स्थानीय संस्कृति इस आयोजन के दौरान विशेष आकर्षण का केंद्र बनते हैं।

भारत, म्यांमार और एशिया के विभिन्न देशों से आए पर्यटकों का यहां गर्मजोशी से स्वागत किया जाता है। बर्मी लोगों की पारंपरिक मेहमाननवाज़ी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और लोकजीवन की झलक इस उत्सव को अंतरराष्ट्रीय पहचान देती है।

लगभग 22 किलोमीटर दूर स्थित पांगसाऊ पास अंतरराष्ट्रीय सीमा द्वार को फेस्टिवल के साथ ही खोला जाता है, जिससे यह आयोजन केवल उत्सव नहीं बल्कि भारत–म्यांमार समन्वय का जीवंत संदेश बन जाता है।

यह तीन दिन सीमाओं के नहीं, बल्कि दिलों के खुलने का प्रतीक होते हैं जहां इतिहास, संस्कृति और भविष्य एक साथ चल पड़ते हैं।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!