कलंग की लहरों संग थिरका नगांव, भोगाली बिहू ने रचा उत्सव
विधायक रूपक शर्मा ने अपने संबोधन में नेहरूबाली के भोगाली बिहू को संभवतः असम का पहला मंचीय बिहू उत्सव बताते हुए नगांव को पर्यटन के मानचित्र पर और सशक्त बनाने के प्रयासों की जानकारी दी। मेजी प्रज्वलन के साथ जब आग की लपटें उठीं, तो वातावरण में उत्सव की गर्माहट और गहरी हो गई।

डिंपल शर्मा
नगांव 17 जनवरी 2026/असम.समाचार
नगांव शहर के कलंग नदी के तट पर स्थित नेहरूबाली क्षेत्र इन दिनों भोगाली बिहू की खुशबू और रंगों से सराबोर नजर आया। कड़ाके की ठंड को मात देते हुए लोग सुबह से देर रात तक उत्सव के रंग में डूबे रहे। ढोल-पेपा की धुन, स्वयं सहायता समूहों की बिक्री प्रदर्शनी और असमिया ग्रामीण जीवन की सजीव झलकियों ने नेहरूबाली को किसी जीवंत सांस्कृतिक चित्र की तरह सजा दिया।

सदौ नगांव भोगाली बिहू उत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित 113वें भोगाली बिहू उत्सव के तीसरे दिन की शुरुआत एक भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा से हुई।
रंग-बिरंगे परिधानों और लोककलाओं से सजी इस शोभायात्रा का उद्घाटन जल संसाधन मंत्री पीयूष हाजरिका ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने नेहरूबाली के भोगाली बिहू को असम की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए कहा कि माघ बिहू केवल पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी सौहार्द का संदेश है।

उन्होंने मेजी की आग को द्वेष और दूरी को जलाने वाली प्रतीकात्मक शक्ति बताया और नगांव को अपना प्रिय शहर बताते हुए उत्सव में शामिल होने पर प्रसन्नता जताई। शोभायात्रा में लोकप्रिय कलाकार राजेश भूइयां, देवजीत मजूमदार, अभिनेत्री यशस्वी भूइयां सहित कई सांस्कृतिक हस्तियां मौजूद रहीं।
बिहू उत्सव समिति के अध्यक्ष रंजीत कुमार तामुली फुकन, कार्यकारी अध्यक्ष एवं विधायक रूपक शर्मा, सचिव जयंत कुमार बोरा और अन्य सदस्यों की सहभागिता ने आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया। विभिन्न जाति-जनजातियों की कला और संस्कृति से सजी इस यात्रा ने पूरे नगांव शहर को कुछ समय के लिए ही सही, लेकिन उत्सवमय माहौल में बदल दिया।

शोभायात्रा के बाद जुबिन गर्ग के गीतों पर आधारित तीन वर्गों में गायन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी आवाज़ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। दोपहर में बच्चों और युवाओं के लिए चित्रांकन प्रतियोगिता हुई, तो संध्या सत्र में ‘मायाबिनी रातिर बुकुत’ की थीम पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने भावनाओं का सुंदर संसार रच दिया।
इससे पहले 13 जनवरी को स्वयं सहायता समूहों की बिक्री प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ उत्सव की औपचारिक शुरुआत हुई थी। भेलाघर में नाम-कीर्तन, राज्य बाल एवं नारी गृह के निवासियों के साथ बिहू का जलपान, बिहू ध्वज का उत्तोलन और स्मारिका ‘भोगाली’ का विमोचन—हर कार्यक्रम में परंपरा और सामाजिक सरोकार साफ झलकते रहे।
विधायक रूपक शर्मा ने अपने संबोधन में नेहरूबाली के भोगाली बिहू को संभवतः असम का पहला मंचीय बिहू उत्सव बताते हुए नगांव को पर्यटन के मानचित्र पर और सशक्त बनाने के प्रयासों की जानकारी दी। मेजी प्रज्वलन के साथ जब आग की लपटें उठीं, तो वातावरण में उत्सव की गर्माहट और गहरी हो गई।
सम्मान समारोह में शहर के वरिष्ठ समाजसेवियों और गणमान्य नागरिकों को सम्मानित किया गया। बच्चों के खेल-कूद और हेमा दास स्मृति मुक्त क्विज प्रतियोगिता ने उत्सव को पारिवारिक स्वरूप दिया, वहीं संध्या के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।
नेहरूबाली का यह भोगाली बिहू केवल एक पर्व नहीं, बल्कि नगांव की सामूहिक संस्कृति, स्मृति और आत्मीयता का उत्सव बनकर उभरा है। 18 जनवरी की रात भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ यह ऐतिहासिक आयोजन संपन्न होगा, लेकिन इसकी गूंज और गर्माहट लोगों के दिलों में लंबे समय तक बनी रहेगी।



