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“महक माटी री” में गूंजा मारवाड़ी रस, कविताओं ने जोड़ा संस्कृति से संवाद

महक माटी री ने यह संदेश दिया कि जब भाषा, कविता और समाज एक मंच पर मिलते हैं, तो संस्कृति केवल स्मृति नहीं रहती वह जीवंत हो उठती है।

ओपी शर्मा

गुवाहाटी 17 दिसंबर 2025/असम.समाचार

छत्रीबाड़ी स्थित परशुराम सेवा सदन शनिवार को मारवाड़ी संस्कृति और भाषा की सुगंध से सराबोर रहा, जब मारवाड़ी सम्मेलन गुवाहाटी महिला शाखा के सौजन्य से “महक माटी री” शीर्षक से मारवाड़ी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। राजस्थानी भाषा में प्रस्तुत कविताओं ने श्रोताओं को माटी, मान और संस्कार से जोड़ते हुए भावनाओं की अनूठी यात्रा कराई।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय उपाध्यक्ष (मुख्यालय) विनोद लोहिया, विशिष्ट अतिथि प्रेरक वक्ता रिचा मिश्र (पुणे), मंडलीय उपाध्यक्ष सुशील गोयल, महिला शाखा अध्यक्ष संतोष शर्मा सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

स्वागत भाषण में शाखा अध्यक्ष संतोष शर्मा ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान और संस्कार की संवाहक है। उन्होंने चिंता जताई कि भीड़ में कहीं हमारी मातृभाषा खोती जा रही है, जिसे बचाने के लिए ऐसे मंच अत्यंत आवश्यक हैं। कविता ज्ञान, सम्मान और जन-जागरण का सशक्त माध्यम है बस जरूरत है प्रतिभाओं को अवसर देने की।

प्रेरक वक्ता रिचा मिश्र ने महिला सशक्तिकरण पर प्रभावशाली वक्तव्य देते हुए कहा कि असम के मारवाड़ी समाज ने अपनी भाषा को सहेजने के लिए अनुकरणीय प्रयास किए हैं। उन्होंने यूनेस्को के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि विश्व की 7000 भाषाओं में से हर दो सप्ताह में एक भाषा लुप्त हो रही है ऐसे में इस तरह के आयोजन भाषा संरक्षण की दिशा में जरूरी कदम हैं।

मुख्य अतिथि विनोद लोहिया ने राजस्थानी भाषा में संबोधन देते हुए आने वाली पीढ़ी को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ने के सतत प्रयासों पर जोर दिया।

कवि सम्मेलन में कवियत्री पुष्पा सोनी, प्रज्ञा माया शर्मा, प्रतिभा शर्मा, कुमुद शर्मा तथा कवि मनोज नायाब और किशोर अग्रवाल ने मारवाड़ी काव्य पाठ से खूब तालियां बटोरीं। कविताओं में लोक, जीवन, नारी शक्ति और माटी की महक साफ झलकी।

कार्यक्रम में सोनारी से भाजपा के वरिष्ठ नेता अनूप सिंह राजपुरोहित, राजस्थानी लोक गायक बद्री व्यास, कलाकार महेंद्र गौड सहित मारवाड़ी सम्मेलन के विभिन्न पदाधिकारी और सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। संचालन कार्यक्रम संयोजिका प्रज्ञा माया शर्मा ने किया, जबकि उपाध्यक्ष रश्मि जैन ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

महक माटी री ने यह संदेश दिया कि जब भाषा, कविता और समाज एक मंच पर मिलते हैं, तो संस्कृति केवल स्मृति नहीं रहती वह जीवंत हो उठती है।

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