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इसरो-आईआईटी गुवाहाटी की बड़ी खोज…ब्लैक होल से आ रहे सिग्नल को किया कैच, डिकोड हुआ सीक्रेट मैसेज

दूरस्थ ब्लैक होल से आने वाले झिलमिलाते एक्स-रे सिग्नल का रहस्य आईआईटी गुवाहाटी सहित अंतरराष्ट्रीय शोध दल ने सुलझाया

विकाश शर्मा

गुवाहाटी, 18 अगस्त 2025

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी, इसरो के यू. आर. राव सैटेलाइट सेंटर और इजरायल की हाइफ़ा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक बड़ा खगोलीय रहस्य उजागर किया है। टीम ने भारत के अंतरिक्ष वेधशाला AstroSat की मदद से पृथ्वी से लगभग 28 हज़ार प्रकाश वर्ष दूर स्थित ब्लैक होल GRS 1915+105 से निकल रहे रहस्यमयी एक्स-रे सिग्नल को डिकोड किया है।

 

शोध में पाया गया कि यह ब्लैक होल अपने आसपास की गैस को खींचते हुए बेहद गर्म हो जाता है और लगातार एक्स-रे उत्सर्जित करता है। खास बात यह है कि ब्लैक होल की चमक सैकड़ों सेकंड तक उजली और फिर सैकड़ों सेकंड तक धुंधली बनी रहती है। इस दौरान तेज़ झिलमिलाहट (फ्लिकरिंग) केवल उजली अवस्था में देखी गई।

 

IIT गुवाहाटी के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर संतबरत दास ने कहा,

“हमने पहली बार यह प्रमाण पाया है कि ब्लैक होल से तेज़ एक्स-रे फ्लिकरिंग लगभग 70 बार प्रति सेकंड (∼70 Hz) की दर से होती है। यह संकेत तभी दिखते हैं जब ब्लैक होल अधिक चमकदार अवस्था में होता है, जबकि धुंधली अवस्था में ये गायब हो जाते हैं। यह खोज AstroSat की अद्वितीय क्षमताओं से संभव हो पाई।”

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस झिलमिलाहट का कारण ब्लैक होल के चारों ओर मौजूद कोरोना है, जो कभी सिकुड़कर बेहद गर्म हो जाता है और कभी फैलकर ठंडा पड़ जाता है। यही परिवर्तन तेज़ सिग्नल को जन्म देता है।

इसरो के डॉ. अनुज नंदी ने कहा,

“हमने पहली बार एक्स-रे फ्लिकरिंग का सीधा सबूत पाया है। यह सीधे-सीधे ब्लैक होल के कोरोना में होने वाले बदलावों से जुड़ा है।”

इस खोज से न केवल ब्लैक होल के आसपास के अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण और तापमान के बारे में गहरी जानकारी मिली है, बल्कि यह भी समझने में मदद मिलेगी कि ब्लैक होल किस तरह बढ़ते हैं, ऊर्जा छोड़ते हैं और अपनी आकाशगंगाओं को आकार देते हैं।

यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका Monthly Notices of the Royal Astronomical Society में प्रकाशित हुआ है।

शोध दल में शामिल रहे वैज्ञानिक

प्रो. संतबरत दास एवं शोधार्थी सेषाद्रि मजूमदार (IIT गुवाहाटी)

डॉ. अनुज नंदी (यू. आर. राव सैटेलाइट सेंटर, इसरो)

डॉ. स्रीहरी हरिकेश (हाइफ़ा यूनिवर्सिटी, इज़रायल)

 

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