डाक विभाग का ‘संगीतमय अधिकारी’: बिनायक भट्टाचार्य
यह कहानी बताती है कि अगर जज़्बा हो तो ऑफिस की मेज़ और ज़िंदगी के सुर दोनों को बराबरी से साधा जा सकता है।

राजा शर्मा
धुबड़ी 16 अगस्त 2025/असम.समाचार
कौन कहता है कि डाकिया सिर्फ ख़त ही लाता है? धुबरी में तैनात भारतीय डाक सेवा के अधिकारी बिनायक भट्टाचार्य तो सुरों की चिट्ठी भी बाँटते हैं। दिन में डाक विभाग की व्यस्त फाइलों और दफ्तर के कामकाज में डूबे रहने वाले भट्टाचार्य जब शाम ढलती है, तो हाथ में कभी हारमोनियम, कभी सैक्सोफोन, तो कभी ड्रम्स थाम लेते हैं।
उनकी ये धुनें महज़ संगीत नहीं, बल्कि एक संदेश हैं “नशे से दूर रहो, ज़िंदगी से प्यार करो।”
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने साफ़ कहा “आज की युवा पीढ़ी जिस तरह से नशे की गिरफ्त में जा रही है, उससे लड़ने का मेरा तरीका संगीत है।”
लोगों की भी राय है कि जब बिनायक की उंगलियाँ सुरों पर नाचती हैं, तो दिलों में उम्मीद और जागरूकता की लहर उठती है। धुबरी की गलियों में अब सिर्फ डाक नहीं, बल्कि संगीत की गूंज भी पहुँच रही है—वो भी एक डाक अधिकारी की ओर से।
यह कहानी बताती है कि अगर जज़्बा हो तो ऑफिस की मेज़ और ज़िंदगी के सुर दोनों को बराबरी से साधा जा सकता है।