अरुणाचल प्रदेश

विश्व की सबसे ऊँची परशुराम प्रतिमा को मिला नाम “शक्तिपुंज परशुराम”

परशुराम कुंड तीर्थ समिति के चेयरमैन एवं राजस्थान फाउंडेशन के असम और नॉर्थ ईस्ट चैप्टर के अध्यक्ष रतन शर्मा ने कहा- "यह केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि भारत के आध्यात्मिक बल, विप्र गौरव और सांस्कृतिक एकता का सजीव प्रतीक है। हमारा संकल्प है कि इसका भव्य लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कर-कमलों से कराया जाए।"

लोहित, अरुणाचल प्रदेश 14 अगस्त 2025/असम.समाचार

ओमप्रकाश शर्मा

सनातन आस्था के पावन केंद्र ईशान कोण में स्थित आदि-तीर्थ परशुराम कुंड आज ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना।

अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में विश्व की सबसे ऊँची 54 फीट पंचधातु निर्मित भगवान परशुराम प्रतिमा का नामकरण भव्य समारोह में किया गया।

प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री चाउना मीन ने मंगलध्वनियों और उत्साहपूर्ण वातावरण में घोषणा की “Statue of Strength” अर्थात ‘शक्तिपुंज परशुराम’।

2022 में शुरू हुई थी भव्य परियोजना

केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से 2022 में परशुराम कुंड तीर्थोन्नयन योजना प्रारंभ हुई।
विप्र फाउंडेशन को इस दिव्य कार्य का दायित्व मिला।
भूमि पूजन का शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कर-कमलों से हुआ, और विख्यात मूर्तिकार नरेश कुमावत ने इस अद्वितीय प्रतिमा का निर्माण कार्य शुरू किया, जो अब अंतिम चरण में है।

 

विप्र फाउंडेशन की भूमिका

संस्थापक सुशील ओझा के दूरदर्शी नेतृत्व और अथक परिश्रम से यह सपना साकार हुआ।
परियोजना संयोजक परमेश्वर शर्मा को श्रद्धा से “हमारे हनुमान” कहा गया, जिन्होंने दिन-रात जुटकर इस दिव्य संकल्प को गति दी।

गौरव के क्षण

परशुराम कुंड तीर्थ समिति के चेयरमैन एवं राजस्थान फाउंडेशन के असम और नॉर्थ ईस्ट चैप्टर के अध्यक्ष रतन शर्मा ने कहा-

“यह केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि भारत के आध्यात्मिक बल, विप्र गौरव और सांस्कृतिक एकता का सजीव प्रतीक है। हमारा संकल्प है कि इसका भव्य लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कर-कमलों से कराया जाए।”

धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व

ईशान कोण, जिसे सनातन परंपरा में देवस्थान माना गया है, सुख, समृद्धि और सुमंगल का प्रतीक है।
यहीं स्थित परशुराम कुंड सदियों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आस्था केंद्र रहा है।
नई प्रतिमा न केवल आस्था का केंद्र बनेगी, बल्कि प्रदेश के पर्यटन और आध्यात्मिक विकास में भी नई ऊँचाई जोड़ेगी।

 

समारोह में उपस्थिति

पूज्य महंत हरिशरण दास महाराज परशुराम बाबा, राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष रमेश शास्त्री, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संजय त्रिवेदी, तथा अनेक गणमान्यजन और असंख्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

यह ऐतिहासिक घोषणा भारतीय संस्कृति, विप्र गौरव और राष्ट्रीय एकता के इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगी।

 

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!