अवैध कब्जों पर मुख्यमंत्री का बयान: “मियां मुस्लिमों के खिलाफ ही चल रहा असम का बेदखली अभियान”
असम की आधी जमीन उनके पास चार में है, अब वे शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जैसे इलाकों में बसना चाहते हैं। यह कैसे संभव है? फिर मूल असमिया लोग कहां जाएंगे?

कनक चंद्र बोरो
कोकराझार 11 अगस्त 2025/असम.समाचार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को स्पष्ट किया कि राज्य में चल रहा बेदखली अभियान खासतौर पर ‘मियां मुस्लिम’ समुदाय के खिलाफ है, न कि सामान्य तौर पर सभी अल्पसंख्यकों के। यह सफाई उन्होंने ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन (आमसु) के आरोपों के बाद दी।
चिरांग में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा की
“बेदखली राज्यभर में मियां मुस्लिमों के खिलाफ की जाएगी। ये अभियान उन वनभूमि, ग्राम चराई भूमि (विजीआर) और पेशेवर चराई भूमि (पीजीआर) को खाली कराने के लिए हैं, जिन पर मियां मुस्लिमों ने अवैध कब्जा किया है।”
‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल ऐतिहासिक रूप से असम में बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए होता रहा है, जिनमें से कई को अन्य समुदाय बांग्लादेशी घुसपैठिया मानते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “यह कार्रवाई अल्पसंख्यक बहुल इलाकों को निशाना बनाने के लिए नहीं है। अगर बोड़ो या मिसिंग समुदाय के लोग ऐसे क्षेत्रों में पाए जाते हैं, तो उन्हें जमीन का हक (पट्टा) मिल सकता है। लेकिन गैर-जनजातीय लोगों को वनभूमि पर पट्टा नहीं दिया जा सकता।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मियां मुस्लिम पहले से ही नदी के किनारे स्थित चार (रेत के टापू) क्षेत्रों पर बड़े पैमाने पर कब्जा किए हुए है।
“असम की आधी जमीन उनके पास चार में है, अब वे शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जैसे इलाकों में बसना चाहते हैं। यह कैसे संभव है? फिर मूल असमिया लोग कहां जाएंगे?” मुख्यमंत्री ने सवाल किया।