असमिया भाषा को शास्त्रीय दर्जा दिलाने की दिशा में एक और बड़ा कदम
सांचीपात पांडुलिपियाँ राष्ट्रपति भवन पुस्तकालय को सौंपी गईं

नई दिल्ली, 22 जुलाई
(असम.समाचार)
राष्ट्रीय डेस्क
असमिया भाषा की शास्त्रीय पहचान को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से मंगलवार को श्रीमंत शंकरदेव कला क्षेत्र सोसाइटी ने पांच प्राचीन सांचीपात पांडुलिपियों का संग्रह राष्ट्रपति भवन पुस्तकालय को संरक्षण एवं प्रदर्शनी हेतु औपचारिक रूप से सौंपा।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में कला क्षेत्र के सचिव सुदर्शन ठाकुर ने इन अमूल्य सांचीपात पांडुलिपियों को राष्ट्रपति भवन की सचिव दीप्ति उमाशंकर को सौंपा। इस अवसर पर असम भवन, नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी, असम सरकार एवं भारत सरकार के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा के मार्गदर्शन तथा मुख्य सचिव रवी कोटा के निर्देश पर श्रीमंत शंकरदेव कला क्षेत्र सोसाइटी ने असम के विभिन्न सत्रों (वैष्णव मठों) से इन पांडुलिपियों का संकलन किया।
राष्ट्रपति भवन पुस्तकालय की शोभा बढ़ाने वाली प्रमुख सांचीपात पांडुलिपियों में शामिल हैं,
‘कीर्तन घोषा’, महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव की रचना, श्री श्री दक्षिणपाट सत्र, माजुली के सत्राधिकार श्री श्री ननीगोपाल देव गोस्वामी द्वारा योगदान।
‘आदि दशम’, भागवत पुराण के दशम स्कंध पर आधारित शंकरदेव की काव्यात्मक अनुवाद रचना, श्री श्री नरुआ कुजी सत्र (वैकुंठपुर थान), मोरीगांव के सत्राधिकार श्री श्री नित्यानंद देव गोस्वामी द्वारा योगदान।
‘नाम घोषा’, महापुरुष श्री श्री माधवदेव की रचना, श्री श्री उत्तर कमलाबाड़ी सत्र, माजुली के सत्राधिकार श्री श्री जनार्दन देव गोस्वामी द्वारा योगदान।
‘भक्ति रत्नावली’, संस्कृत ग्रंथ का असमिया अनुवाद, माधवदेव की कृति, श्री श्री कमलाबाड़ी सत्र, तिताबार के सत्राधिकार श्री श्री भावकांत देव गोस्वामी द्वारा योगदान।
‘गीत गोविंद’, संस्कृत के कवि जयदेव की प्रसिद्ध कृति का असमिया अनुवाद, कविराज चक्रवर्ती द्वारा स्वर्गदेव रुद्र सिंह के दरबार में रचित। इसे जामुगुरी, जोरहाट के सुरेन फुकन द्वारा दान स्वरूप सौंपा गया।
कला क्षेत्र के सचिव ठाकुर ने इन प्राचीन पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने में योगदान देने वाले सभी सत्राधिकारों और सहयोगियों के प्रति आभार जताया।
उन्होंने कहा, “इस ऐतिहासिक पहल से असमिया भाषा की समृद्ध धरोहर को नई गति और सम्मान मिलेगा।”



